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एमडीएम पर सवाल: शिकायत के एक माह बाद भी नहीं बदली संस्था, घटिया भोजन के आरोपों पर कार्रवाई का इंतजार

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राजकीय बालिका इंटर कॉलेज नरही की प्रधानाचार्य ने 17 अगस्त को डीबीएसए को लिखी थी शिकायत, भोजन की गुणवत्ता सुधारने की मांग

जांच में कम उपस्थिति, भोजन के सैंपल और रजिस्टर को लेकर भी सामने आईं खामियां; अधिकारियों की कार्रवाई पर उठे सवाल

गिरीश तिवारी 

लखनऊ। राजधानी में मिड डे मील (एमडीएम) योजना के संचालन और भोजन की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। परिषदीय विद्यालयों में अक्षयपात्र के माध्यम से भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है, जबकि नगर क्षेत्र के कई विद्यालयों में स्वयंसेवी संस्थाओं के जरिए एमडीएम की आपूर्ति की जा रही है। इसी व्यवस्था के तहत कुछ स्कूलों में भोजन की गुणवत्ता, विद्यार्थियों की वास्तविक उपस्थिति, एमडीएम रजिस्टर और भोजन के सैंपल से जुड़े मामले सामने आने का दावा किया गया है।

सबसे प्रमुख मामला राजकीय बालिका इंटर कॉलेज नरही/जियामऊ से जुड़ा है, जहां प्रधानाचार्य रागिनी मिश्रा ने 17 अगस्त 2026 को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को पत्र भेजकर भोजन की गुणवत्ता पर आपत्ति जताई थी। शिकायत के मुताबिक, विद्यालय में सरोज जन कल्याण समिति की ओर से भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है और छात्राओं को दिया जा रहा भोजन गुणवत्ता की कसौटी पर ठीक नहीं है।

प्रधानाचार्य ने कहा- छात्राओं के स्वास्थ्य के लिए भोजन लाभप्रद नहीं

प्रधानाचार्य की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया था कि भोजन की गुणवत्ता को लेकर पहले भी जानकारी दी जा चुकी है, लेकिन सुधार नहीं हुआ। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया कि समिति की ओर से उपलब्ध कराया जा रहा भोजन छात्राओं के स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद नहीं है।

शिकायतकर्ता के अनुसार, भोजन की गुणवत्ता में सुधार के लिए संस्था को पहले भी अवगत कराया गया था। इसके बावजूद एक माह से अधिक समय बीतने के बाद भी संस्था को बदले जाने या उसके खिलाफ कार्रवाई किए जाने की स्थिति स्पष्ट नहीं हुई।

इस मामले में जब जिला समन्वयक आनंद गौड़ से सवाल किया गया तो उनका कथित जवाब था कि मामले की जांच कराई जाएगी और जांच में भोजन ठीक पाया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित संस्था को कोई नोटिस नहीं दिया गया है।


जांच रिपोर्ट में भोजन की गुणवत्ता पर भी उठे सवाल

खबर के अनुसार, एमडीएम व्यवस्था की निगरानी के लिए गठित अधिकारियों की टीम ने विभिन्न विद्यालयों का निरीक्षण किया था। इस दौरान कुछ स्थानों पर भोजन की गुणवत्ता को लेकर प्रतिकूल टिप्पणियां सामने आने का दावा किया गया है।

हालांकि, इन निरीक्षण रिपोर्टों के आधार पर संबंधित संस्थाओं के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। इसी को लेकर शिकायतकर्ताओं की ओर से विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

निशातगंज के स्कूल में 95 के मुकाबले 55 छात्र मिले

जांच के दौरान राजकीय इंटर कॉलेज निशातगंज में भी विद्यार्थियों की उपस्थिति को लेकर अंतर सामने आने का दावा किया गया। यहां 95 विद्यार्थी नामांकित बताए गए, जबकि निरीक्षण के समय 55 विद्यार्थी ही मौजूद मिले।

नियम के अनुसार भोजन का सैंपल विद्यालय बंद होने तक, यानी करीब 1:30 बजे तक सुरक्षित रखा जाना चाहिए। आरोप है कि निरीक्षण के दौरान भोजन का सैंपल उपलब्ध नहीं था। इससे एमडीएम की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे।

आर्यकन्या पाठशाला में आधी छात्राएं मिलीं

बादशाह नगर स्थित आर्यकन्या पाठशाला में भी नामांकित छात्राओं की तुलना में मौके पर कम उपस्थिति मिलने की बात सामने आई। यहां एमडीएम रजिस्टर को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी।

बताया गया कि निरीक्षण टीम ने प्रधानाचार्य ममता राव से रजिस्टर उपलब्ध कराने को कहा, लेकिन रजिस्टर प्रस्तुत नहीं किया जा सका। टीम की ओर से बाद में संबंधित दस्तावेजों की फोटो उपलब्ध कराने को कहा गया था। आरोप है कि निर्धारित समय में भी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया।

इस विद्यालय में उन्मेष संस्था की ओर से भोजन उपलब्ध कराए जाने की बात सामने आई है। शिकायत में संस्था के भोजन की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, भोजन की गुणवत्ता और रिकॉर्ड में किसी तरह की अनियमितता के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

मोतीलाल मेमोरियल गर्ल्स इंटर कॉलेज में भी कम उपस्थिति का दावा

मोतीलाल मेमोरियल गर्ल्स इंटर कॉलेज में भी निरीक्षण के दौरान नामांकन की तुलना में विद्यार्थियों की संख्या कम मिलने की बात कही गई है। यहां एमडीएम से संबंधित रजिस्टर उपलब्ध न होने और भोजन का सैंपल नहीं मिलने का भी दावा किया गया।

विद्यालय में प्रधानाचार्य नुजहत से रजिस्टर के संबंध में जानकारी मांगी गई। निरीक्षण के दौरान एक शिक्षिका के अवकाश पर होने की बात भी सामने आने का दावा किया गया।

प्राथमिक विद्यालय भीखमपुर में 26 बच्चों का आधार कार्ड नहीं बना

पेपर मिल कॉलोनी स्थित प्राथमिक विद्यालय भीखमपुर में भी निरीक्षण के दौरान विद्यार्थियों की उपस्थिति अपेक्षाकृत कम मिलने की बात सामने आई। यहां 26 ऐसे बच्चों के मिलने का दावा किया गया, जिनके आधार कार्ड अभी तक नहीं बने थे।

आधार कार्ड नहीं होने के कारण बच्चों से जुड़े रिकॉर्ड और सरकारी योजनाओं में उनकी स्थिति को लेकर भी विभागीय स्तर पर सत्यापन की जरूरत बताई जा रही है।

एडी बेसिक की रिपोर्ट पर भी कार्रवाई का सवाल

मामले में यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि एमडीएम व्यवस्था को लेकर अधिकारियों की जांच और रिपोर्ट के बाद विभागीय स्तर पर क्या कार्रवाई हुई। शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि जांच रिपोर्टों में खामियां सामने आने के बावजूद संबंधित संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा रही है।

हालांकि, विभाग की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है। बेसिक शिक्षा अधिकारी विपिन कुमार से संपर्क किए जाने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका पक्ष उपलब्ध नहीं हो सका।

शिकायत के बाद अब कार्रवाई का इंतजार

राजधानी के विद्यालयों में बच्चों को मिलने वाले मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता सीधे उनके स्वास्थ्य से जुड़ा विषय है। ऐसे में किसी विद्यालय की ओर से भोजन की गुणवत्ता को लेकर लिखित शिकायत किए जाने के बाद उसकी जांच और कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।

फिलहाल नरही स्थित राजकीय बालिका इंटर कॉलेज की शिकायत को एक माह से अधिक समय बीतने के बाद भी संबंधित संस्था को बदलने अथवा उसके खिलाफ कार्रवाई किए जाने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। दूसरी ओर, निरीक्षण में सामने आई बताई जा रही कमियां भी एमडीएम व्यवस्था की निगरानी पर सवाल खड़े करती हैं।

इस पूरे मामले में जांच रिपोर्ट, एमडीएम रजिस्टर, भोजन के सैंपल और संबंधित संस्था के रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कहीं नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं। संबंधित संस्था और जिन व्यक्तियों पर आरोप लगाए गए हैं, उनका पक्ष सामने आने पर खबर को और स्पष्ट किया जा सकता है।

 

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